CGNET

तिल्दा

Published 23 September 2020

"नई शांति प्रक्रिया की विधिवत शुरुआत 8-10 जून 2018 के बीच तिल्दा, जिला रायपुर, छत्तीसगढ़ में हुई एक बैठक में हुई जिसमें दण्डकारण्य के 6 प्रदेशों से लगभग 150 लोग शामिल हुए |

बैठक में दिल्ली, हैदराबाद और उत्तर पूर्वी राज्यों के कुछ साथी भी शामिल हुए | सबसे उल्लेखनीय उपस्थिति बोड़ो स्टूडेंट्स यूनियन के प्रमोद बोड़ो की रही जिन्होंने विस्तार से यह बताया कि कैसे वे लोग पहले अलग बोडोलैंड के लिए सशस्त्र संघर्ष कर रहे थे लेकिन फिर बातचीत का रास्ता अपनाया और बातचीत के बाद बोडो ऑटोनोमस ( स्वायत्त) संस्था का गठन हुआ |

बोड़ो भाषा को आठवीं अनुसूची में स्थान मिला और अब सभी स्कूलों में बोड़ो में भी पढ़ाई होती है| इस बैठक में विभिन्न राज्यों से बुद्धिजीवियों और विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने भी भाग लिया |

आँध्रप्रदेश में हुई पिछली शांति प्रक्रिया के प्रमुख प्रतिभागी प्रोफ़ेसर जी हरगोपाल ने कहा यद्यपि हमारे पिछले अनुभवों से हमें इस तरह की प्रक्रियाओं से बहुत कम आशा है पर हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है और हमें इस तरह के प्रयास लगातार करते रहना चाहिए |

यदि इस प्रक्रिया से हम युद्धरत किसी भी पक्ष की एक जान भी बचा पाते हैं तो वह भी इस प्रक्रिया की बड़ी जीत होगी | कांग्रेस के आदिवासी नेता अरविन्द नेताम, भाजपा के नन्दकुमार साय, सीपीआई के मनीष कुंजाम, छत्तीसगढ़ के प्रथम वित्त मंत्री रामचंद्र सिंहदेव, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरद बेहार, वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन, श्रवण गर्ग, मणिमाला, गांधीवादी चिंतक मोहन हीराबाई हीरालाल और आदिवासी नेता देवाजी तोफा, सिडम आरजू, छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के प्रमुख बीपीएस नेताम और दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर मधुलिका बैनर्जी आदि की उपस्थिति प्रमुख रही |

बैठक में आगे के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के लिए विभिन्न राज्यों में अगली बैठक करने का निर्णय लिया गया | "