Ramesh Kunjam, 12thFebruary 2021
सोमारू कर्मा को याद है उस साल 2015 में धन की फसल बहुत अच्छी हुई थी और उसकी माँ कोहले बाई कोरता त्यौहार भर नाची थी | बारिश अच्छी होने से दाले भी जैसे राजमा ,उड़द ,पेरमी ,अरहर और कोदों की पैदावार भी जमकर हुई थी | माँ बहित ही खुश थी और अपने दोनों बेटो सोमारू और विष्णु को बहुत प्यार करती थी |कोहले जंगल से कई किस्म की सब्जियाँ लेकर आती और पकाकर खिलाती | उसे कभी भी जंगल से डर नहीं लगा |वो देखती थी जंगल ने कुछ लडके और लड़किया हथियार लेकर घूमते थे और गाँव के बच्चो को भुलाकर कुछ बाते भी करते थे |उसे कभी समझ नहीं आया की वो लोग जंगल से बहार क्यों नहीं आते कभी -कभी ये लोंग जिन्हें गाँव के लोंग दादा लोग बुलाते ,दाल ,चावल इकट्ठा करने के लिए हर घर में आते थे |सभी लोंग अपनी हैसियत के हिसाब से उनकी झोली में डाल देते थे
सोमारू शाम के समय बकरिया लेकर जब खेत से वापस आया तो विष्णु भी घर में भर कर लाया और कोहले साग काट रही थी |सोमारू बोला अब हम गावं में नहीं रहेंगे क्योकि कुछ दादा लोगो ने कहा है की गाँव में रहोंगे तो मर दिया जायगा |कोहले ने बात को समझने की कोशिश की विष्णु पढ़ाई के लिए गाँव से बहार जाता तो कुछ दादा लोगो को लगता है की वो उनके बारे में पुलिस कोप खबर देता होगा |कोहले ने समझाया की वो दादा लोगो से बात करेगी और गाँव छोड़ कर बाहर रहना ठीक नहीं है |लेकिन सोमारू और विष्णु ने रात में ही सामान पैक किया और अँधेरे में ही ओरछा के लिए निकल पड़े |कोहले बहुत रोई उसने गाँव छोड़ने से इंकार कर दिया | सोमारू और विष्णु नारायणपुर में रहने लगे और कुछ दिन बाद सोमारू ने अपनी सगुन्ती से शादी कर ली वो अब कुम्हारपारा इलाको में रहते है |विष्णु ओरछा के स्कूल में पढ़ाता है |उसकी बीबी किसी वजह से उसे छोड़ कर चली गई है |
कोहले बाई कभी इस बात से समझोता नह्हिया कर पाई की उसके बेटे को गाँव से बाहर निकल दिया और कई बार दादा लोगो से उलझ जाती थी |कई बार वो अपने बेटे से मिलाने नारायणपुर भी आती थी |उग्रवादी लड़को को उस पर शक था की वो उनकी उपास्थिति के बारे में बेटो को जरुर खबर देगी और वो खबर पुलिस तक पहुच सकती है |इसी शक में 2017 में कोहले बाई की धारदार हथियारों से गाँव के पास ही हत्या कर दी गई |उस समय कोहल की उम्र करीब 55 साल थी |कोहले बाई ने कभी हालातो से समझोता नहीं किया |आदेर गाँव में सब उनकी इज्जत करते थे |कोहले बाई गाँव के सभी उत्सवों में शामिल होती थी और सुन्दर गानों केव लिए प्रसिद्द थी |कोहले बाई एक बहादुर औरत थी |अब उसका सिर्फ फोटो बचा है जिसको फ्रेम में मढ़वा कर उसके बेटे और बहू सगुन्ती ने दीवार पर टांग दिया है | सोमारू और विष्णु ने अपनी माँ की हत्या की पुलिस रिपोर्ट भी नहीं कराई है |उन्हें मालूम है की रपट लिखना कोई आसान काम नहीं है |यदि रपट लिखी जाती है टो उन्हें कुछ मुआवजा मिल सकता है लेकिन माँ की हत्या से मरने का दुःख उससे कम नहीं होने वाला|
क्या कभी कोई उस बहादुर औरत कोहले बाई की कहानी को सुनाएगा |
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