Gavendra Deshmukh 29th January 2021
बीजापुर, जेलवाड़ा शिविर के पास सोमलु पुनेम अपने परिवार के साथ रहते हैं। सोमलु ग्राम बूरजी के निवासी हैं। बूरजी गंगालूर से पांच किलोमीटर की दूरी पर है। गंगालूर बीजापुर से 20 किलोमीटर दूर एक पंचायत है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनवरी 2021 में बीजापुर प्रवास के दौरान गंगालूर को तहसील बनाने की घोषणा की है।
गंगालूर से आगे बाहरी लोगों का आना जाना ना के बराबर है। गंगालूर से पुशनार तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया गया है। गंगालूर से अंदर की ओर रहने वाले ग्रामीण किसी भी सरकारी कार्य का समर्थन नहीं करते, इसलिए सड़क निर्माण रोकने के लिए समय-समय पर ग्रामीणों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जाता रहा है।
सोमलू साल 2006 के बाद से बीजापुर में रह रहे हैं। वह सलवा जुडूम के समय एसपीओ थे। सोनू के सलवा जुडूम से जुड़ते ही गांव के लोग उनके विरोध में रहे।
उनके गांव में पुलिस द्वारा कुछ ग्रामीणों की नक्सली होने के संदेह में हत्या कर दी गई। इस बात से ग्रामीण काफी नाराज थे, उन्हें यह शक था कि यह जानकारी सोमलू ने ही पुलिस को दी होगी। शक के आधार पर नक्सली सोमलू के घर आए और उनके पिता मासा पुनेम और भाई लक्ष्क्षु पुनेम को साथ ले गए। नक्सलियों ने उनका घर भी लूट लिया। नक्सलियों ने मासा और लक्ष्क्षु से पूछताछ की और उन्हें जान से मार दिया। घटना के बाद सोमरू अपने परिवार को लेकर कुछ दिन गंगालूर के शिविर में रहे। बाद में वे बीजापुर आकर रहने लगे।
सोमलू के परिवार में उनकी मां बुधरी आज भी गांव में रहती हैं। उन्हें गांव से बाहर जाने-आने से मना किया जाता है। कभी-कभी चोरी छुपे वे अपने परिवार से मिलने बीजापुर आती हैं। बुधरी के चार बेटे और तीन बहूएं अपने परिवार के साथ बीजापुर में रहते हैं। उनके दो बेटे अभी पढ़ाई कर रहे हैं। एक बेटा मजदूरी करता है, सोमलु सहायक आरक्षक हैं।
बुधरी की बहू बताती है, गांव जाने पर कोई उनसे या उनके परिवार के किसी सदस्य से बात भी नहीं करता। इतना ही नहीं यदि राह चलते कोई बात कर भी ले तो उनसे गांव वाले पूछताछ करते हैं। आज तक इस परिवार को ना ही कोई आवास मिला है, ना कोई जमीन। नक्सल पीड़ित परिवारों को मिलने वाली अन्य सहायता जैसे नौकरी या पढ़ाई में मदद भी नहीं मिली है
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